हरियाणा सरकार बड़ा फैसला। 2.5 लाख लोगों की लेबर कापी होगी रद्द। परिवार पहचान पत्र से हुआ खुलासा

हरियाणा सरकार बड़ा फैसला। 2.5 लाख लोगों की लेबर कापी होगी रद्द। परिवार पहचान पत्र से हुआ खुलासा

6 लाख निर्माण श्रमिकों में से ढाई लाख कर रहे दूसरे काम, पंजीकरण होगा रद्द
Out of 6 lakh construction workers, 2.5 lakh are doing other work, registration will be canceled

प्रदेश सरकार की ओर से शुरू किए गए परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) के जरिए अब भवन निर्माण श्रमिकों के पंजीकरण में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। ऐसे ढाई लाख से ज्यादा लोग मिले हैं, जिन्होंने श्रम विभाग में खुद को श्रमिक बताकर पंजीकरण कराया हुआ है, लेकिन जब परिवार पहचान पत्र बना तो सामने आया कि वे कोई दूसरा काम करते हैं। प्रदेश में श्रम विभाग में करीब 6 लाख श्रमिक पंजीकृत हैं, इनमें 2.55 लाख ने पीपीपी में खुद अपना काम दूसरा बताया है। इसका खुलासा तब हुआ, जब क्रिड की ओर से श्रम विभाग से पंजीकृत श्रमिकों का डेटा लेकर पीपीपी के डेटा से मिलान किया। सामने आया कि जो खुद को कंस्ट्रक्शन वर्कर बता कर श्रम विभाग की हजारों- लाखों रुपए की योजनाओं से फायदा ले रहे हैं, श्रमिक नहीं हैं। अब श्रम विभाग की ओर से पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। इन 2.55 लाख श्रमिकों का एक बार फिर डेटा खंगाला जाएगा, ताकि वास्तविक श्रमिकों को ही योजनाओं का लाभ मिल सके। इसके बाद कइयों का पंजीकरण रद्द हो सकता है। फर्जी पंजीकरण मिलने की पुष्टि होने के बाद आंच महकमे के अधिकारियों व कर्मचारियों तक भी आएगी। इन श्रमिकों के लिए श्रम विभाग की 22 योजनाएं संचालित की जा रही है, जिसमें बच्चों की पढ़ाई से लेकर कन्यादान योजना, पेंशन योजना और आर्थिक मदद शामिल हैं।

अलग-अलग बोर्ड करते हैं श्रमिकों के लिए काम

प्रदेश में श्रमिकों से जुड़े 2 बोर्ड हैं। इनमें एक हरियाणा लेबर वेलफेयर बोर्ड, तो दूसरा बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड है। हरियाणा लेवर वेलफेयर ऑर्गेनाइज सेक्टरों फैक्ट्री व शॉप एस्टेब्लिशमेंट के तहत काम करने वाले श्रमिकों के लिए योजनाएं संचालित करता है। इसके तहत करीब 28 लाख श्रमिक पंजीकृत हैं, तो कंस्ट्रक्शन व अन्य • काम करने वाले लगभग 6 लाख अनऑर्गेनाइज्ड श्रमिकों के लिए बीओसीडब्ल्यू काम करता है।

साल में 90 दिन ही होता है भवन निर्माणः एसोसिएशन

भवन निर्माण कारिगर मजदूर यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष एडवोकेट राजेंद्र सिंह का कहना है कि कंस्ट्रेक्शन वर्कर का पंजीकरण कराने के लिए श्रमिक को साल में कम से कम 90 दिन काम करना जरूरी है। इसके बाद यदि कोई दूसरा काम करता है तो इसमें गलत नहीं है। हो सकता है कि जब पीपीपी के फॉर्म भरा गया हो, उस वक्त वह कोई दूसरा काम कर रहा हो। इसलिए सरकार को किसी का पंजीकरण रद्द नहीं. करना चाहिए। कंस्ट्रक्शन वर्कर की कई कैटेगरी है।

जानिए… किस जिले में कितने दूसरे काम वाले मिले

Now a big mistake has come to the fore in the registration of building workers through the Parivar Pehchan Patra (PPP) started by the state government. More than two and a half lakh such people have been found, who have registered themselves in the labor department as laborers, but when the family identity card was made, it came to the fore that they do some other work. About 6 lakh workers are registered in the labor department in the state, out of which 2.55 lakh have given their work in PPP as second. It was revealed then,When the data of registered workers from the Labor Department on behalf of CRID was matched with the data of PPP. It came to the fore that those who are taking benefits from the schemes of the Labor Department worth thousands and lakhs of rupees by pretending to be construction workers, are not workers. Now the entire matter will be investigated by the Labor Department. The data of these 2.55 lakh workers will be scrutinized once again, so that only the actual workers can get the benefits of the schemes.For these workers, 22 schemes of the Labor Department are being operated, ranging from children’s education to Kanyadan scheme, pension scheme and financial help.

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